हेल्थ के लिए पब्लिक डेटा

Abhishaike Mahajan और Jacob Trefethen द्वारा

अप्रैल में हमने 'अल्ज़ाइमर्स के लिए AI' लॉन्च किया था⁠, जो लाइफ़ साइंसेज़ एंड क्योरिंग डिज़ीज़ेज़ के लिए OpenAI Foundation का पहला प्रोग्राम था. आज हम अपना दूसरा साइंस प्रोग्राम पेश कर रहे हैं: हेल्थ के लिए पब्लिक डेटा.

'अल्ज़ाइमर्स के लिए AI' में हमारा फ़ोकस एक ऐसी बीमारी पर है जो कई परिवारों पर असर डालती है और जहाँ हमें लगता है कि AI, साइंटिस्ट्स को बेहतर इलाज डेवलप करने में मदद कर सकता है. 'हेल्थ के लिए पब्लिक डेटा' में हमारा फ़ोकस कई बीमारियों पर लाइफ़ साइंसेज़ की प्रोग्रेस बढ़ाने पर है. इसके लिए हम हाई-क्वालिटी साइंटिफ़िक डेटासेट बनाने और सुरक्षित रखने के काम को फ़ंड कर रहे हैं, ताकि वे बड़े स्तर पर रिसर्चर्स को मिल सकें.

साइंटिफ़िक डेटा हमारे आसपास की दुनिया से जुड़ी जानकारियाँ हैं, जो रिसर्च और नई खोजों की नींव बनती हैं. मैथेमैटिक्स के कुछ क्षेत्रों में, जहाँ नई जानकारी जुटाए बिना भी नए नतीजों को वेरिफ़ाई किया जा सकता है, AI सिस्टम अब नए⁠ नतीजों और समझ⁠ में योगदान देने लगे हैं⁠. वहीं बायोलॉजी में AI सिस्टम बड़े पैमाने पर बायोलॉजिकल जानकारी का एनालिसिस कर रहे हैं और अधूरी जानकारी से भी छिपे हुए पैटर्न समझने लगे हैं, कई बार बेहद तेज़ी से.

लेकिन हमारा मानना है कि बीमारियों की रोकथाम और इलाज में आगे के कई बड़े ब्रेकथ्रू तब आएँगे, जब नए मॉडल्स की इंटेलिजेंस को दुनिया से जुड़ी ज़्यादा ऑब्ज़र्वेशन्स, यानी ज़्यादा डेटा, के साथ जोड़ा जाएगा.

कुछ डेटासेट्स लोगों के लिए बहुत ज़्यादा काम के हो सकते हैं, लेकिन हो सकता है कि वे कभी बनाए या शेयर ही न किए जाएँ, क्योंकि किसी एक संस्था के पास उन्हें फ़ंड करने के लिए पर्याप्त वजह या क्षमता नहीं होती. इसलिए हेल्थ से जुड़े पब्लिक डेटा को सपोर्ट करना OpenAI Foundation के काम के साथ अच्छी तरह फ़िट बैठता है.

हमारी शुरुआती ग्रांट्स

शुरुआत में हम नॉनप्रॉफ़िट संस्थाओं और यूनिवर्सिटीज़ को $125 मिलियन से ज़्यादा की ग्रांट्स दे रहे हैं. ये ग्रांट्स डेटा के कई स्तरों को कवर करेंगी, जैसे मॉलिक्यूल्स, एपिडेमियोलॉजी और रेग्युलेटरी नॉलेज.

जिन प्रोजेक्ट्स को हम सपोर्ट कर रहे हैं, उनके कुछ उदाहरण यहाँ दिए गए हैं:

  1. OpenADMET⁠ ओपन डेटासेट्स, बेंचमार्क्स और ब्लाइंडेड कॉम्पिटिशन्स बनाएगा. इनके ज़रिए यह टेस्ट किया जाएगा कि क्या AI मॉडल्स को इस बात का अनुमान लगाने के लिए ट्रेन किया जा सकता है कि छोटे मॉलिक्यूल्स शरीर में कैसे एब्ज़ॉर्ब और डिस्ट्रीब्यूट होते हैं. इसका मकसद ड्रग डेवलपमेंट को ज़्यादा अनुमान लगाने लायक बनाना और नई दवाओं के फ़ेल होने की दर को कम करना है.

    90% दवाओं के ऑप्शन्स क्लिनिकल ट्रायल्स में फ़ेल हो जाते हैं⁠. इसकी एक बड़ी वजह यह अनुमान लगाना मुश्किल होना है कि वे शरीर में वे कैसे घुलेंगे और कैसे आगे बढ़ेंगे—यानी उनकी "ADMET" प्रॉपर्टीज़⁠ क्या होंगी. ऐसे अनसुलझे अनुमानों के चैलेंज AI के लिए अच्छे हो सकते हैं, खासकर जब अलग-अलग मॉडल्स के अनुमानों की एक्यूरेसी जाँचने के लिए हाई-क्वालिटी डेटा मौजूद हो. उदाहरण के लिए, AlphaFold2 ने 'प्रोटीन डेटा बैंक'⁠ के डेटा का इस्तेमाल करके प्रोटीन स्ट्रक्चर के अनुमानों में बड़ा बदलाव किया. इसे CASP⁠ की ओर से चलाए गए एक कॉम्पिटिशन में दूसरे मॉडलिंग के तरीकों के सामने टेस्ट किया गया था. अब प्रोटीन स्ट्रक्चर के अनुमान कई ड्रग डिस्कवरी प्रोग्राम्स का हिस्सा है, जिनसे आगे चलकर मरीज़ों को फ़ायदा मिल सकता है.

    दवाओं के ऑप्शन्स की ADMET प्रॉपर्टीज़ का बेहतर अनुमान लगाने के लिए OpenADMET टीम हाई-क्वालिटी डेटासेट्स बनाएगी, जिनका इस्तेमाल नए प्रेडिक्टिव मॉडल्स को बेहतर आधार देने के लिए किया जाएगा. टीम ओपन चैलेंजेज़ भी चलाएगी, जिनमें दुनिया भर के रिसर्चर्स हिस्सा ले सकेंगे.

    UCSF में स्पीकर्स ऑडियंस के सामने OpenADMET के ADMET से जुड़े अनुमान लगाने वाले चैलेंजेज़ के बारे में बता रहे हैं.

    ADMET से जुड़े अनुमान लगाने वाले चैलेंजेज़ में हिस्सा लेने वालों के लिए हाल में आयोजित OpenADMET इवेंट में प्रेज़ेंटेशन. क्रेडिट: नाओमी हैंडली.

    "ड्रग डिस्कवरी में ऐसे कई कॉमन चैलेंजेज़ हैं, जिन्हें किसी खास बीमारी का इलाज खोज रही कोई एक कंपनी या अकैडमिक लैब अकेले हल नहीं कर सकती," OpenADMET गवर्निंग बोर्ड के सदस्य और UCSF में बायोइंजीनियरिंग एंड थेरेप्यूटिक साइंसेज़ के प्रोफ़ेसर और चेयर जेम्स फ़्रेज़र, PhD ने कहा. "OpenADMET को इन समस्याओं पर ओपन और मशीन लर्निंग के लिए तैयार तरीके से काम करने के लिए बनाया गया है. हमें खुशी है कि हम वह बेस लेयर बना पा रहे हैं, जिसकी मदद से AI नई इलाज के डेवलपमेंट को काफ़ी तेज़ कर सकेगा."

  2. CTD Commons⁠ उन दवा बनाने के प्रोग्राम्स की रेग्युलेटरी नॉलेज को सुरक्षित रखेगा और पब्लिश करेगा जो सफल नहीं हो पाए. इससे आने वाली टीमें उन पुराने मामलों से सीख सकेंगी, जिनकी जानकारी आम तौर पर शेयर नहीं की जाती, और मरीज़ों के लिए असरदार इलाज तेज़ी से खोजने में मदद मिल सकेगी.

    CTD, यानी 'कॉमन टेक्निकल डॉक्यूमेंट', CTD, एक ऐसा डॉक्यूमेंट है जिसमें जाँच के दौर से गुज़र रही किसी दवा से जुड़ी पूरी जानकारी एक जगह होती है. इसमें जानवरों पर किए गए टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट, दवा बनाने से जुड़ी जानकारी और शायद सबसे काम की चीज़, FDA के साथ हुई बातचीत की जानकारी शामिल होती है. लेकिन इस काम का बहुत छोटा हिस्सा ही पब्लिश किए गए रिसर्च पेपर्स में सामने आता है.

    CTD Commons यह टेस्ट करेगा कि फ़ेल हो चुके या रोक दिए गए दवा प्रोग्राम्स से CTD हासिल करना कितना संभव है. इसके बाद इन्हें रिसर्च और एनालिसिस के लिए सभी के लिए आसानी से उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि हर कोई इनका इस्तेमाल कर सके.

    "हर FDA सबमिशन के पीछे रिसर्चर्स, रिव्यूअर्स और स्टडी में हिस्सा लेने वाले लोगों की कड़ी मेहनत और कई त्याग होते हैं. ये कोशिशें सफल न भी हों, तो उनसे मिली काम की जानकारी बेकार नहीं जानी चाहिए," CTD Commons के लीड ऑर्गेनाइज़र और 1Day Sooner के प्रेसिडेंट जॉश मॉरिसन ने कहा. "CTD Commons दोहराए जाने वाले काम और लागत को कम करेगा, और क्लिनिकल रिसर्च के असर को ज़्यादा-से-ज़्यादा बढ़ाने में मदद करेगा."

  3. UNC⁠, 'जेनरेटिव इम्युनोथेरेपी के लिए एक पहल' शुरू करेगा और कई तरह के पब्लिक डेटा तैयार करेगा. इससे ऐसे भविष्य की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी, जहाँ कैंसर का पता चलते ही मरीज़ों के लिए तेज़ी से उनकी ज़रूरत के मुताबिक कैंसर वैक्सीन तैयार की जा सके.

    आज की "नियोएंटीजन" कैंसर वैक्सीन्स उन गिनी-चुनी दवाओं में से हैं जिन्हें हर मरीज़ के लिए कंप्यूटेशन की मदद से अलग-अलग डिज़ाइन किया जाता है. इसके लिए ट्यूमर सेल की सीक्वेंसिंग करके अनुमान लगाया जाता है कि उसकी सतह पर ट्यूमर से जुड़े कौन-से खास टारगेट मौजूद हैं. लेकिन सीक्वेंसिंग असल स्थिति का सिर्फ़ एक संकेत देती है, क्योंकि सेल की सतह पर मौजूद टारगेट्स को सीधे मापना मुश्किल और महँगा है. साथ ही, यह जाँचना भी मुश्किल है कि मरीज़ का इम्यून सिस्टम इनमें से हर प्रोटीन पर कितनी मज़बूती से रिएक्ट करता है.

    UNC सैकड़ों ट्यूमर्स और कई तरह के कैंसर में इन छूटी हुई कड़ियों से जुड़ा डेटा तैयार करेगा. इससे इस क्षेत्र के शुरुआती ट्रेनिंग और इवैल्यूएशन डेटासेट्स में से एक बनेगा. इसमें पहचान से जुड़ी जानकारी हटाकर डेटा पब्लिक किया जाएगा, ताकि दुनिया भर के रिसर्चर्स इसका इस्तेमाल करके आगे काम कर सकें.

    एलेक्स रुबिनस्टाइन, PhD, जो UNC स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में जेनेटिक्स के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं, उन्होंने कहा, "हर मरीज़ के लिए खास तौर पर तैयार की जाने वाली कैंसर वैक्सीन्स अब क्लिनिकल तौर पर असर दिखाने लगी हैं, लेकिन अभी भी कुछ कमियाँ हैं जिन्हें इलाज डेवलप करने के पारंपरिक तरीके से दूर करने में दशकों लग सकते हैं. हाई-क्वालिटी डेटा इन कमियों को तेज़ी से दूर करने में हमारी मदद कर सकता है. हमें खुशी है कि इस समय को कम करने और बड़े स्तर पर असरदार पर्सनलाइज़्ड इम्यूनोथेरेपी को हकीकत बनाने में मदद कर सकते हैं.

    बाहर एक साथ मौजूद नॉर्थ कैरोलाइना यूनिवर्सिटी की रिसर्च टीम.

    नॉर्थ कैरोलाइना यूनिवर्सिटी में पर्सनलाइज़्ड कैंसर वैक्सीन्स पर काम करते लैब के मेंबर्स. क्रेडिट: UNC.

हमारी शुरुआती स्ट्रैटेजी

हमें लगता है कि यह सेक्शन उन रिसर्चर्स के लिए खास तौर पर काम का होगा जो भविष्य में OpenAI Foundation की ग्रांट के मौकों में दिलचस्पी रखते हैं.

काम लायक साइंटिफ़िक डेटा इतना ज़्यादा है कि कोई एक फ़ंडर उन सभी को इकट्ठा करने में मदद नहीं कर सकता. इसलिए हम रिसर्च कम्युनिटी के साथ यह बताना चाहते हैं कि किस तरह के डेटा के लिए OpenAI Foundation का सपोर्ट सबसे ज़्यादा काम आ सकता है.

शुरुआत में हमारा फ़ोकस तीन तरह के डेटा पर है: कनेक्टेड डेटा, दुर्लभ डेटा और डायरेक्ट डेटा. जिन डेटासेट्स को हम फ़ंड करेंगे, उनमें आम तौर पर इनमें से एक या दो खूबियाँ होंगी, जिनके बारे में नीचे और जानकारी दी गई है. कुछ कम मामलों में किसी डेटासेट में ये तीनों खूबियाँ हो सकती हैं.

सभी डेटासेट्स के लिए हमारा मानना है कि डेटा को ज़्यादा-से-ज़्यादा लोगों तक पहुँचाना लगातार अहम होता जाएगा. जहाँ मरीज़ों का डेटा शामिल हो, वहाँ प्राइवेसी का ध्यान रखना भी उतना ही ज़रूरी है. इससे रिसर्चर्स एक-दूसरे के काम को आगे बढ़ा सकेंगे और साइंस में नई प्रोग्रेस ऐसी जगहों से भी आ सकेगी जहाँ उसकी उम्मीद न हो.

  1. कनेक्टेड डेटा: बायोलॉजी को कई स्टेप्स में समझना

    बायोलॉजी को अलग-अलग स्तरों पर समझा जाता है, लेकिन ज़्यादातर लाइफ़ साइंस डेटासेट्स असल तस्वीर का सिर्फ़ एक हिस्सा दिखाते हैं. उदाहरण के लिए, एक सेल एटलस हज़ारों सेल्स में मॉलिक्यूल्स को माप सकता है, जबकि सिंगल-मॉलिक्यूल इमेजिंग सिर्फ़ एक सेल पर फ़ोकस करती है. दोनों नज़रिए काम के हैं, लेकिन ऐसे डेटासेट्स आम तौर पर अलग-अलग बनाए जाते हैं. इसलिए यह समझने में सालों का अतिरिक्त काम लग सकता है कि अलग-अलग साइंटिफ़िक नतीजे एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं. हम रिसर्च टीमों को इन अलग-अलग स्तरों के बीच सोच-समझकर काम करने और ऐसे बड़े, कनेक्टेड डेटासेट्स बनाने में मदद करना चाहते हैं, जिनकी अलग-अलग लेयर्स एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझने में मदद करें.

    उदाहरण के लिए, UCSF को हमारी ग्रांट से OpenADMET टीम दसियों हज़ार कंपाउंड्स की अहम मॉलिक्यूलर प्रॉपर्टीज़ और उनके बीच होने वाले इंटरैक्शन्स को माप सकेगी. इसके बाद टीम इस बड़े स्तर की प्रोफ़ाइल को दवा ट्रांसपोर्ट के दो पहलुओं से जोड़ेगी. पहला, चुने हुए मॉलिक्यूल्स से जुड़े ट्रांसपोर्टर प्रोटीन्स की एक्सपेरिमेंट से तय किया गया स्ट्रक्चर. दूसरा, ऐसे टेस्ट जो मापेंगे कि ये प्रोटीन्स मॉलिक्यूल्स के साथ किस तरह काम करते हैं. आखिर में, टीम इनमें से कुछ कंपाउंड्स को इंसानों के ब्लड-ब्रेन बैरियर के मॉडल्स में टेस्ट करेगी और इन नतीजों की तुलना जीवित जानवरों में किए गए माप से करेगी.

    डेटा जुटाने का यह तरीका इस बात की पूरी तस्वीर देगा कि कोई दवा शरीर में कैसे और क्यों मूव करती है. इससे AI मॉडल्स उन नतीजों का बेहतर अनुमान लगा सकेंगे जो लोगों के लिए सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं.

  2. दुर्लभ डेटा: उस डेटा को बचाना जिसे दोबारा तैयार नहीं किया जा सकता

    भविष्य का AI कितना भी बेहतर क्यों न हो, वह समय में पीछे जाकर उन खास पलों में हुई बायोलॉजिकल घटनाओं को नहीं देख सकता. उदाहरण के लिए, ऐसे देशों में मौत और खराब सेहत की वजहें जहाँ भरोसेमंद वाइटल स्टैटिस्टिक्स मौजूद नहीं हैं, या मरीज़ों से किसी खास समय पर लिए गए बायोलॉजिकल सैंपल्स में क्या था. बायोलॉजी में ऐसे कई मौके होते हैं जो एक बार निकल जाएँ तो वापस नहीं आते. भविष्य में मॉडल बनाने वाले लोग ऐसे सबूतों का ऐसा इस्तेमाल खोज सकते हैं जिसके बारे में आज के रिसर्चर्स सोच भी न पाएँ. इसलिए हमें खास तौर पर ऐसे प्रपोज़ल्स में दिलचस्पी है जो मौका खत्म होने से पहले काम का डेटा इकट्ठा करें या बचाकर रखें. साथ ही, ऐसे मौजूदा प्राइवेट डेटासेट्स को ज़्यादा लोगों तक पहुँचाएँ जिन्हें दोबारा कभी तैयार नहीं किया जा सकेगा, और ऐसा करते समय प्राइवेसी और हर व्यक्ति की सहमति का ध्यान रखें.

    उदाहरण के लिए, CTD Commons को हमारी ग्रांट से यह पता लगाया जाएगा कि क्या फ़ेल हो चुके ड्रग डेवलपमेंट के प्रोग्राम्स के रिकॉर्ड्स को कंपनियाँ बंद होने और रिकॉर्ड्स गायब होने से पहले बचाया जा सकता है. कम समय में ये डॉक्यूमेंट्स शुरुआती दौर की ड्रग डेवलपमेंट टीमों को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि इसी तरह के प्रोडक्ट्स से रेग्युलेटर्स ने क्या माँगा है. इससे महँगे ट्रायल एंड एरर के ज़रिए सीखने की ज़रूरत कम हो सकती है. लंबे समय में ये डॉक्यूमेंट्स मशीन लर्निंग सिस्टम्स के लिए एक काम का सोर्स बन सकते हैं, जिससे यह समझने में मदद मिले कि दवाएँ क्यों फ़ेल या सफल होती हैं. इससे रेग्युलेशन और ट्रायल के तरीकों में सुधार हो सकता है और मरीज़ों को नई ट्रीटमेंट्स का फ़ायदा जल्दी मिल सकता है.

  3. डायरेक्ट डेटा: उन बायोलॉजिकल और क्लिनिकल स्थितियों को मापना जो सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं

    बायोलॉजी के इतिहास में लंबे समय तक वही चीज़ें मापी गईं जिन्हें मापना आसान या सस्ता था. उदाहरण के लिए, इंसानों के क्लिनिकल डेटा के बजाय अलग-अलग सेल्स का डेटा मापना, या प्रोटीन्स के बजाय RNA एक्सप्रेशन को देखना. ऐसे प्रॉक्सी बहुत काम के रहे हैं, लेकिन कभी-कभी वे बायोलॉजी को समझने और बीमारी को रोकने या उसका इलाज करने के असली मकसद से दूर भी हो सकते हैं. ऐसे मामलों में हम रिसर्चर्स को वे रिसोर्सेज़ देना चाहते हैं जिनकी मदद से वे ऐसे डेटासेट्स बना सकें जो सबसे अहम चीज़ों को सीधे मापें. यह भी हो सकता है कि "बायोलॉजिकल ट्रुथ" को मापने के लिए ज़रूरी टूल्स अभी मौजूद ही न हों, या बड़े स्तर पर उनका इस्तेमाल करना बेहद महँगा हो. इस प्रोग्राम के तहत हम दोनों तरह के काम को सपोर्ट करना चाहते हैं—नया डेटा भी और नए टूल्स भी.

    उदाहरण के लिए, UNC में 'जेनरेटिव इम्युनोथेरेपी के लिए एक पहल' शुरू करने के लिए हमारी ग्रांट से UNC Lineberger और UNC Health की टीम अगली पीढ़ी की कैंसर वैक्सीन्स को बेहतर बनाने के लिए इंसानों से सीधे जुड़ा ज़रूरी डेटा तैयार कर सकेगी. इसका मतलब है कि सिर्फ़ ट्यूमर की सीक्वेंसिंग करने के बजाय ट्यूमर सेल्स की सतह पर मौजूद प्रोटीन्स और मरीज़ों के T सेल रिस्पॉन्स को सीधे मापा जाएगा. इस तरह का डेटा तैयार करना महँगा है. इस बार इसे पूरी तरह इकट्ठा करके और नतीजों को सबके लिए उपलब्ध कराकर, हमें उम्मीद है कि भविष्य में कैंसर वैक्सीन पर होने वाले सभी काम को इसका फ़ायदा मिलेगा. खास तौर पर, अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य की वैक्सीन को इंसानों पर टेस्ट करते समय रिसर्चर्स के पास बेहतर टारगेट्स का सेट होगा. इससे उनके असरदार होने की संभावना बेहतर होनी चाहिए और असर न होने पर भी उनसे ज़्यादा सीखने को मिल सकेगा.

यह पक्का करना कि रिसर्चर्स को डेटा आसानी से मिल सके

आखिर में, हमारी सभी ग्रांट्स में हम यह पक्का कर रहे हैं कि उनसे तैयार होने वाले डेटासेट्स दुनिया भर के रिसर्चर्स के लिए जितना हो सके उतनी आसानी से मिल सके.

साइंस के इतिहास के बड़े हिस्से में किसी हाइपोथिसिस को टेस्ट करना नई खोजों की राह में एक बड़ी रुकावट रहा है. किसी समस्या पर काम करने के लिए सीमित "इंटेलिजेंस" होती थी—जैसे तय संख्या में ग्रैजुएट स्टूडेंट्स और अनुभवी साइंटिस्ट्स, जो डेटा तैयार करते और उसका एनालिसिस करते थे. कोडिंग और डेटा एनालिसिस में AI की लगातार प्रोग्रेस इस सोच को बदल रही है. डेटा का एनालिसिस अब बहुत बड़े स्तर पर किया जा सकता है, और ऐसे सहयोग से नई बातें सामने आ सकती हैं जिनका अंदाज़ा डेटा तैयार करते समय लगाना मुश्किल हो.

हमारा मिशन यह पक्का करना है कि आर्टिफ़िशियल जेनरल इंटेलिजेंस से पूरी इंसानियत को फ़ायदा मिले. हमारे सपोर्ट से तैयार होने वाला साइंटिफ़िक डेटा ज़्यादा-से-ज़्यादा लोगों को मिलना चाहिए. जहाँ इंसानों का डेटा शामिल हो, वहाँ लोगों की प्राइवेसी और सहमति का ध्यान रखना ज़रूरी है. लेकिन डेटा को एक्सेस करने का मतलब सिर्फ़ डेटा रिलीज़ करने तक सीमित नहीं है. हम ग्रांट पाने वाली टीमों को अपने एनालिसिस प्रीप्रिंट्स के ज़रिए पब्लिश करने, डेटा सिर्फ़ आखिर में नहीं बल्कि लगातार शेयर करने और अगर उनका डेटा "कनेक्टेड" नहीं है, तो डेटा इस्तेमाल करने वालों के साथ मिलकर यह देखने के लिए कहते हैं कि वह बायोलॉजी से जुड़ी अहम समस्याओं पर कितना काम का है.

लगातार सीखना

यह पोस्ट 'हेल्थ के लिए पब्लिक डेटा' को लेकर हमारी शुरुआती सोच बताती है. साइंस और AI के आगे बढ़ने के साथ, और रिसर्च कम्युनिटी के दूसरे लोगों से बातचीत के आधार पर, हम अपनी सोच को लगातार अपडेट कर रहे हैं.

अगर आपके पास 'हेल्थ के लिए पब्लिक डेटा' के लिए कोई आइडिया है, तो हम आपसे [email protected]⁠ पर संपर्क करने के लिए कहेंगे. हमारे प्रोग्राम्स और फ़ंडिंग से जुड़े आगे के अपडेट्स के लिए आप यहाँ⁠ हमारे न्यूज़लेटर को सब्सक्राइब भी कर सकते हैं.

अगर आपको इस पोस्ट में बताई गई समस्याओं पर फ़ुल-टाइम काम करना दिलचस्प लगता है, तो हम अभी 'लाइफ़ साइंसेज़ एंड क्योरिंग डिज़ीज़ेज़' टीम में चार पदों⁠ के लिए भर्ती कर रहे हैं.